Vrat Kathayen

Mahalaxmi Vrat Katha – महालक्ष्मी व्रत कथा

Mahalaxmi Vrat Katha एक बार महालक्ष्मी का त्यौहार आया. हस्तिनापुर में गांधारी ने नगर की सभी स्त्रियों को पूजा का निमंत्रण दिया परन्तु कुन्ती से नहीं कहा. गांधारी के १००…
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श्री भगवान्‌ का प्राकट्य और बाललीला का आनंद

दोहा : * जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥190॥ भावार्थ:-योग, लग्न, ग्रह, वार और तिथि सभी अनुकूल हो गए। जड़ और…
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राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ, रानियों का गर्भवती होना

* गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी॥ यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा॥3॥ भावार्थ:-वे (वानर) पर्वतों और जंगलों…
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भगवान्‌ का वरदान

दोहा : * जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह। गगनगिरा गंभीर भइ हरनि सोक संदेह॥186॥ भावार्थ:-देवताओं और पृथ्वी को भयभीत जानकर और उनके स्नेहयुक्त वचन सुनकर शोक और…
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पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार

पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार चौपाई : * बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा॥ मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा॥1॥ भावार्थ:-पराए धन और…
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प्रतापभानु की कथा

चौपाई : * सुनु मुनि कथा पुनीत पुरानी। जो गिरिजा प्रति संभु बखानी॥ बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू॥1॥ भावार्थ:-हे मुनि! वह पवित्र और प्राचीन कथा सुनो,…
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