मनु-शतरूपा तप एवं वरदान

दोहा : * सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाइ। रामकथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ॥141॥ भावार्थ:-हे मुनीश्वर भरद्वाज! मैं वह...

विश्वमोहिनी का स्वयंवर, शिवगणों तथा भगवान्‌ को शाप और नारद का मोहभंग

दोहा : * आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि। कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि॥130॥ भावार्थ:-(फिर) राजा ने राजकुमारी को लाकर नारदजी को...

नारद का अभिमान और माया का प्रभाव

दोहा : * संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान। भरद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान॥127॥ भावार्थ:-यद्यपि शिवजी ने यह हित की शिक्षा दी, पर...

अवतार के हेतु

सोरठा : * सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल। कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड़॥120 ख॥ भावार्थ:-हे पार्वती! निर्मल रामचरितमानस की वह मंगलमयी कथा...

शिव-पार्वती संवाद

दोहा : * जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल। नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल॥106॥ भावार्थ:-उनके सिर पर जटाओं का मुकुट और गंगाजी (शोभायमान) थीं।...

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना दोहा : *सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।...

रति को वरदान

दोहा : * अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु। बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥87॥ भावार्थ:-हे रति! अब से...

सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व

चौपाई : * रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी॥ बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥1॥ भावार्थ:-ऋषियों ने (वहाँ जाकर) पार्वती...