Balkand

श्री रामजी का शिवजी से विवाह के लिए अनुरोध

दोहा : * अब बिनती मम सुनहु सिव जौं मो पर निज नेहु। जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु॥76॥ भावार्थ:-(फिर उन्होंने शिवजी से कहा-) हे शिवजी! यदि मुझ पर…
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पार्वती का जन्म और तपस्या

*सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥ तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥ भावार्थ:-सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा…
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पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस

दोहा : * सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध। सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध॥63॥ भावार्थ:-परन्तु उनसे शिवजी का अपमान सहा नहीं गया, इससे उनके…
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सती का दक्ष यज्ञ में जाना

दोहा : * दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग। नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग॥60॥ भावार्थ:-दक्ष ने सब मुनियों को बुला लिया और वे बड़ा…
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शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि

दोहा : * परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु। प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु॥56॥ भावार्थ:-सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता…
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सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद

* रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना॥ ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी॥4॥ भावार्थ:-श्री रामजी की कथा चंद्रमा की किरणों के समान है, जिसे संत…
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य

* अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद। कहउँ जुगल मुनिबर्य कर मिलन सुभग संबाद ॥43 ख॥ भावार्थ:-मैं अब श्री रघुनाथजी के चरण कमलों को हृदय में धारण कर…
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Ramayan

मानस का रूप और माहात्म्य

दोहा : * जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु। अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥35॥ भावार्थ:-यह रामचरित मानस जैसा है, जिस प्रकार बना है और…
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मानस निर्माण की तिथि / Manas Nirman ki Tithi

* सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥ संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥2॥ भावार्थ:-अब मैं आदरपूर्वक श्री शिवजी को सिर नवाकर श्री…
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