Hanuman Maha Mantras

Hanuman Maha Mantras

दीनदयाल विरिदु संभारी I

हरहु नाथ मम संकट भारी II

जपहि नामु जन आरत भारी I

मिटहि कुसंकट होहि सुखारी II

राजिव नयन  धरें  धनु  सायक I

भगत  विपति  भंजन  सुखदायक II

गुरु बिनु भव निधि तरइ न कोई I

जो विरंचि संकर सम होइ II

श्री गुरु पद नख मनि गन  जोति I

सुमिरत दिव्य दृष्टि हियं होती II

 विस्व भरन पोषन  कर जोई I

ताकर नाम भरत अस होइ II

 जे सकाम नर सुनहि जे गवाहि I

सुख सम्पति नाना विधि पावहि II

 सो तुम्ह जानहु अंतरजामी I

पुरवहु मोर मनोरथ  स्वामी II

 मोरि  सुधारिहि सो सब  भाँती I

जासु कृपा नहि कृपा अधाती II

 सुनहु देव सचराचर स्वामी I

प्रनतपाल उर अंतरजामी II

 सीता राम चरन रति मोरें I

अनुदिन बढ़उ  अनुगह तोरें II

गंगसकल मुद मंगल मुला,

सब सुख करनि हरनी सब सूला II

नाथ सकल सम्पदा तुम्हारी I

मैं सेवक समेत सूत नारी II

स्याम गौर सुन्दर दोउ जोरी I

निरखहि छवि जननी तृन तोरी II

प्रविसि  नगर  कीजें सब काज़ा हृदय राखी कोसलपुर राजा II 

दैहिक दैविक भौतिक तापा I 

राम राज नहि काहुहि व्यापा II

सुनु सिय सत्य असीस हमारी I 

पूजिहि मन कामना तुम्हारी II

सुफल मनोरथ होहुं तुम्हारे।

रामु लखनु सुनी भए सुखारे।। 

Post Author: Bolguru-1