Mangal Dosh Manglik check meaning remedies in Hindi

What is Mangal Dosh: Almost all astrologers are familiar about managal dosh and also, there are some ways – yoga which can help manglik dosh. There are some misconception and hype about manglik done. Here we have some of the facts and information about Mangal Dosh, Manglik check and to understand what is Mangal dosh, remedies in hindi.

auspicious mass defect yet somewhat disturbing flaw is the sum of which is auspicious! If the defect is dissolved ominous AND Vadbyadi yoga poses are not sad, this is an auspicious Bisy Subidartha readers about? And said that the recognition of defects and impurities dissolve what will happen?

मंगली दोष क्या है

मांगलिक दोष के बारे में प्रायः सभी ज्योतिषी जन परिचित है फिर भी कुछ योग है जो की मांगलिक दोष को भंग करते है!यदि दोष भंग योग बन रहा हो तो फिर अशुभ एंव वैधब्यादी दुःख नही होते,इसी बिषय को लेकर पाठकों की सुबिधार्थ मांगलिक क्या है?और उस दोष की मान्यता कहा तक रहेगी और दोष भंग कैसा होता है?
१. जिस जातक की कुंडली,लग्न/चन्द्र कुण्डल्यादि में मंगल ग्रह लग्न से लग्न में १.४.७.८,१२ भावों में कहि भी स्तिथ हो तो उसे मांगलिक कहते है.यहां लग्न कुण्डली के माध्यम से तो आपको प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है।

२. जिस जातक की जन्म कुण्डली के १;४.७.८.१२ वें भाव में कही पर मंगल स्तिथ हो उसी मंगल के साथ सूर्य, शनि,राहु,(पाप ग्रह )भी बैठे हो तो वह पुरुष गोलिया मंगल ,स्त्री जातक चूनड़ी मंगल हो जाती है,अर्थात द्धिगुण मंगली इसी को माना जाता है।

३. वर की कुण्डली मांगलिक हो तो कन्या की मृत्यु (वधु )के लिये घातक होता है और कन्या मांगलिक हो तो वर (पति )के लिये अशुभ विनाश की सूचक है ।

यथा –
लग्ने ब्यये च पातले जामित्रे चाषटमे कुजः |
कन्या भर्तुर्विनाशाय भर्ता कन्या विनाशद ||
४. वर कन्या दोनों की कुण्डली ही मांगलिक हो तो विवाह शुभ और दाम्पत्य जीवन आनन्दमय रहता है । एक सादी एक मंगली ऐसे विपरीत गुणों वाली कुण्डलिया नहीं होनी चाहिये। दोनों ही मांगलिक होते है तो मंगल कीअशुभता दूर हो जाती है ।

५. मांगलिक कुण्डली के सामने यदि मंगल वाले स्थान को छोड़कर दूसरे स्थानो में पाप ग्रह हो तो दोष भंग हो जाता है । उसे फिर मंगली दोष रहित मानी जाती है तथा केंद्र में चन्द्रमा १.४.७.१० वें घर में हो तो मंगली दोष दूर हो जाता है।
शास्त्रकारों का मत ही इसका निर्णय करता है । जहां तक हो मांगलिक से मांगलिक का सम्बन्ध करें। फिर भी यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाये की कोई वर कन्या सभी तरह से विवाह योग्य है तथा दोनों पक्ष के अभिभावक वर कन्या सभी एक दूसरे से संतुष्ट है जैसा आजकल प्रायः सह शिक्षा सह ब्यवसायिको में हो रहा है ।फिर यदि कुंडलीस्थ मंगली अमंगली का विचार उत्तपन्न हो जाये तो वहां १.४.७.८.१२ भावों में कहि मंगल होने से मांगलिक है यह संबंध श्रेष्ठ नही ऐसा नही कहना चाहिए इसके लिए लिखा है-मांगलिक से मांगलिक का विचार कर ले । तथा अन्य भी कई कुयोग है जैसे, वैधब्य, बिसंगना आदि दोषो को दूर रखे इसके लिए ये काम जरूर करें ।

 

१. पीपल विवाह
२. कुंभ विवाह
३. सालिग्राम विवाह
४. मंगल यंत्र का पूजन
या मंगला गौरी व्रत का अनुष्ठान करें विवाह प्रायः कुंडली का मिलान कर के ही करना चाहिए ।
शुभ मस्तु ॥