Mata Jawala ji Aarti:

Jawala Ji, Jwala Devi and Jwalamukhi Ji, is one of the most ancient temple discussed here besides Mata Vaishno Devi. It is mentioned in the Mahabharata and other scriptures. There is a natural cave where eternal flames continue to burn.Some say there are nine flames for the nine Durga Mata ji. Mata jawala ji aarti is chanted during morning and evening puja every day.

mata-jwala-devi

जय ज्वाला रानी जय जवाला रानी |
प्रगती पर्वत उपर कलयुग कल्याणी ||
सती लो की जिन्हा मई गिर अधभूत तेज दिया |
नो जोयोटे फिर प्रगती शुभ इस्तान लिया||
काली लक्ष्मी सरस्वती जवाला ज्योति बड़ी |
हिंगलाज अंनपूर्णा चंदड़ी बीच खड़ी ||
बिन दीपक बिन बाटी पर्वत जोत जले |
जो पूजे साधक बन संकट आप तले ||
चंद्रहस राजा ने शुभ निर्माण किया |
गोरखनाथ गुरु को आदर मान दिया |
ज्योति सभी भुझहने अकबर आया था |
चमा मगकर तुमसे छात्रा चड़ाया था |
सैया भवन है सुंदर मान को आती भावे |
बार-बार दर्शन को है मा मान चहावे ||
पं-सुपारी पेड़ा दूध चड़े जवाला |
शक्ति पीठ को पूजे हाथ लिए माला ||
करे जागरण सेवक प्रेम लिए मान मई |
ऐसा ‘ओम’ आकर्षण तेरे दर्शन मई |