Ramayan

अयोध्याकांड / Ayodhyakand

अयोध्याकांड में श्रीराम वनगमन से लेकर श्रीराम-भरत मिलाप तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे अयोध्याकांड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। • मंगलाचरण • राम राज्याभिषेक की…
Continue Reading
Ramayan

भरतजी का अयोध्या लौटना, भरतजी द्वारा पादुका की स्थापना, नन्दिग्राम में निवास और श्री भरतजी के चरित्र श्रवण की महिमा

दोहा : * सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर। भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर॥321॥ भावार्थ:-छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी समेत प्रभु श्री रामचंद्रजी पर्णकुटी में ऐसे सुशोभित…
Continue Reading
Ramayan

श्री राम-भरत-संवाद, पादुका प्रदान, भरतजी की बिदाई

चौपाई : * भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू॥ भल दिन आजु जानि मन माहीं। रामु कृपाल कहत सकुचाहीं॥1॥ भावार्थ:-(अगले छठे दिन) सबेरे स्नान करके भरतजी, ब्राह्मण,…
Continue Reading
Ramayan

भरतजी का तीर्थ जल स्थापन तथा चित्रकूट भ्रमण

दोहा : * अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप। राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप॥309॥ भावार्थ:-तब अत्रिजी ने भरतजी से कहा- इस पर्वत के समीप ही एक…
Continue Reading
Ramayan

श्री राम-भरत संवाद

दोहा : * राम सपथ सुनि मुनि जनकु सकुचे सभा समेत। सकल बिलोकत भरत मुखु बनइ न ऊतरु देत॥296॥ भावार्थ:-श्री रामचन्द्रजी की शपथ सुनकर सभा समेत मुनि और जनकजी सकुचा…
Continue Reading
Ramayan

जनक-वशिष्ठादि संवाद, इंद्र की चिंता, सरस्वती का इंद्र को समझाना

* आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ॥ करि प्रनामु तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए॥3॥ भावार्थ:-अतः आप आश्रम को पधारिए। इतना कह मुनिराज स्नेह से…
Continue Reading
Ramayan

जनक-सुनयना संवाद, भरतजी की महिमा

दोहा : * बार बार मिलि भेंटि सिय बिदा कीन्हि सनमानि। कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि॥287॥ भावार्थ:-राजा-रानी ने बार-बार मिलकर और हृदय से लगाकर तथा सम्मान करके…
Continue Reading
Ramayan

कौसल्या सुनयना-संवाद, श्री सीताजी का शील

दोहा : * एहि सुख जोग न लोग सब कहहिं कहाँ अस भागु। सहज सुभायँ समाज दुहु राम चरन अनुरागु॥280॥ भावार्थ:-सब लोग कह रहे हैं कि हम इस सुख के…
Continue Reading
Ayodhyakand

जनकजी का पहुँचना, कोल किरातादि की भेंट, सबका परस्पर मिलाप

दोहा : * प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु। सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु॥274॥ भावार्थ:-उस समय सब लोग प्रेम में मग्न हैं। इतने में ही मिथिलापति…
Continue Reading
Ramayan

श्री राम-भरतादि का संवाद

दोहा : * भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि। करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि॥258॥ भावार्थ:-पहले भरत की विनती आदरपूर्वक सुन लीजिए, फिर उस पर विचार कीजिए। तब साधुमत,…
Continue Reading