Introduction of the twelve zodiac signs

The introduction of the twelve zodiac signs

zodiac

1. Aries – Kaalpurush part of the head is on the right of this amount is the shape of the Bende. The amount absorbed is east. The amount Purusjati, Crsnjtrk, Agnittw, Pittprkriti, Bhumipr, with residence, Kshtriyvarn, Ratribli, the courage, valor AND is considered a symbol of Pride goes before. Aries Ascendant native-born children are often reticent AND serious nature.

2. Taurus – The Taurus is like the shape of this amount. The gorge is home to the hegemony. This Strijati, Sthirsnjtrk, soft nature, Bhumittw, south of the mistress, Ratribli, AND is Watprkriti device. There is a Jataka selfish. Are immersed in their living.

3. Gemini – Kaalpurush in part, from shoulder to hand is the rule. Its shape is linked to male-female AND male Lstri harp in the hearth hearth is the mace. This Wayuttw, male leads, Dviswbav, Sudrawarni, Mdhysntti, Shithildeh AND is the mistress of the west. The amount of the sculptures are experts.

4. Cancer – It is as aquatic AND crab. Its location is considered the male body is tense in the chest. The amount Strijati, Crsnjtrk, Kfprvritti, Ratribli, is the mistress of the north. Remain engaged in physical Sukho, farouche, the amount of abdominal, chest, AND kidney are considered.
5. Singh – Singh is the shape of this amount. Cal is on the male organ. Agnittw, stable nounal, male leads, Kshtriyvarn, Ushnprkrit, Purwdisha, is the owner. This amount is similar to Aries nature. There is a Jataka independent AND generous.

6. Virgo – Virgo is the shape of this amount. Its location is on the ventral body, the residence of green grass, land, woman, Rtisthan, studio, occurs. Strijati, Pinglwarni, is the mistress of the south direction. This amount is considered abdomen. Jataka are proud of this amount.
7. Libra – the amount of men to shape the scales. The body is in Nabhipradesh Lhat Kaalpurush, market, AND Byvshayik, is in the sights. It is men, Crsnjtrk, Wayuttw, Shyamvarn, Diwabli, Sudrasnjtrk, AND west of cruel masters. Such thoughtful Jataka, the scriptures interest in politics, Anpana are capable of functioning. Kaalpurush organs of the body below the navel is the place.

8, Scorpio – The Scorpion is much like the shape of this amount. Kaalpurush is absorbed into the body esoteric destination. The amount Strijatk, stable nounal, water elements, Subrwarni, the mistress of the north, Bramhnwarni, consists Kfprviti. This amount consists of the Jataka Dridhnisycyi. There is a sharp vocal AND Aspst. Kaalpurush the body is positioned in the genitals.

9. Sagittarius – the sum of the upper part of the figure, part of the bow from the waist down AND the man is like the horse. Kaalpurush is absorbed in the Jango. This amount Kshtriyvarn Purusjati, Agnittw, is the owner of Purwdisha. The amount Jataka compassionate, altruistic Iswrbkt, Adikarpriy, AND are sobering.

10, Capricorn – but its shape varies. Kaalpurush on both knees in the body is considered. This feminine sum, Watprkriti, Prithvittw, is the mistress of the south direction. It’s expensive, high Kartbyprayan properties.

11. Aquarius – The amount of men to shape the pitcher’s shoulder. It is men, Wayuttw, is owned by West direction. Interest in science has special properties. Kaalpurush’s bodies are considered in the intestines.
12, Pisces – is the amount of fish contours. Kaalpurush is considered to be the bodies of both legs. It is woman

 

बारह राशियों का परिचय

१.मेष -कालपुरुष के अंग में इस राशि का अधिकार सिर पर होता है यह भेंड़े की आकृति का होता है । इस राशि का अधिपत्य पूर्व दिशा में होता है । यह राशि पुरुषजाती, चरसंज्ञक ,अग्नितत्व ,पित्तप्रकृति,भूमिपर,निवास वाली ,क्षत्रीयवर्ण ,रात्रिबली ,इसे साहस ,वीरता एंव अंहकार का प्रतीक माना जाता है। मेष लग्न में जन्म लेने वाले जातक प्रायः गंभीर प्रकृति के एंव अल्पभाषी होते है।

२.वृष – इस राशि की आकृति वृष के तरह होती है । मुख से कण्ठ तक आधिपत्य होता है । यह स्त्रीजाती ,स्थिरसंज्ञक ,शीतल स्वभाव,भुमितत्व,दक्षिण की स्वामिनी ,रात्रिबली,एंव वातप्रकृति युक्ति होती है । ऐसे जातक स्वार्थी होते है । अपने में डूबे रहने वाले होते है।

३.मिथुन -कालपुरुष के अंग में कन्धे से लेकर हांथो तक इसका अधिपत्य होता है। इसकी आकृति स्त्री पुरुष के जोड़ा है ।स्त्री के हाँथ में वीणा एंव पुरुष के हाँथ में गदा होती है । यह वायुतत्व ,पुरुष जाती ,द्विस्वभाव,सुद्रवर्णी ,मध्यसन्तति ,शिथिलदेह एंव पश्चिम दिशा की स्वामिनी है। इस राशि वाले शिल्पकला के प्रवीण होते है ।

४.कर्क -यह जलचर एंव केकड़े के रूप में होती है । काल पुरुष के शरीर में वक्षस्थल इसका स्थान माना जाता है । यह राशि स्त्रीजाती ,चरसंज्ञक, कफप्रवृत्ति,रात्रिबली,उत्तर दिशा की स्वामिनी होती है । भौतिक सुखो में लगे रहना ,लज्जालु ,इस राशि से उदर ,सीना ,एंव गुर्दे का विचार किया जाता है ।

५.सिंह – इस राशि की आकृति सिंह की है। काल पुरुष के अंग हृदय पर होती है । अग्नितत्व ,स्थिर संज्ञक ,पुरुष जाती ,क्षत्रियवर्ण ,उष्णप्रकृत ,पूर्वदिशा ,का स्वामी है । इस राशि का स्वाभाव मेष राशि की तरह ही है । ऐसे जातक स्वत्रंत एंव उदार होते है ।

६.कन्या -इस राशि की आकृति कन्या की है । शरीर में इसका स्थान उदर पर होता है,इसका निवास हरी घास ,भूमि ,स्त्री ,रतिस्थान ,चित्रशाला,में होता है। स्त्रीजाती ,पिंगलवर्णी ,दक्षिण दिशा की स्वामिनी होती है । इस राशि का पेट पर विचार किया जाता है । इस राशि के जातक स्वाभिमानी होते है ।
७. तुला – इस राशि की आकृति तराजू लिए पुरुष की है । कालपुरुष के शरीर में नाभिप्रदेश में होती है ।हाट ,बाजार ,एंव ब्यवशायिक ,स्थलों में होता है । यह पुरुष जाती ,चरसंज्ञक,वायुतत्व ,श्यामवर्ण ,दिवाबली,सुद्रसंज्ञक ,क्रूर एंव पश्चिम दिशा का स्वामी है । ऐसे जातक विचारशील ,शास्त्रो में अभिरुचि वाले राजनीति ,अंपना कार्य करने में दक्ष होते है । कालपुरुष के शरीर में नाभि के निचे के अंगो में स्थान होता है ।

८,वृश्चिक -इस राशि की आकृति बिच्छू की तरह होती है । कालपुरुष के शरीर में गुह्य स्थानो में अधिपत्य होता है । यह राशि स्त्रीजातक,स्थिर संज्ञक ,जल तत्व ,सुभरवर्णी ,उत्तर दिशा की स्वामिनी ,ब्राम्हणवर्णी ,कफप्रविति युक्त होती है । इस राशि के जातक दृढ़निस्यचयी होते है । तीक्ष्ण वाणी युक्त एंव अस्पस्ट होते है । कालपुरुष के शरीर में जननेन्द्रिय स्थान पर होती है ।

९.धनु -इस राशि की आकृति का ऊपरी भाग, धनुष लिए मनुष्य का एंव कमर से नीचे का भाग घोड़े के समान होता है । कालपुरुष के जांघो में इसका अधिपत्य होता है । यह राशि पुरुषजाती क्षत्रीयवर्ण ,अग्नितत्व ,पूर्वदिशा का स्वामी होता है । इस राशि का जातक दयालु ,परोपकारी इस्वरभक्त ,अधिकारप्रिय ,एंव मर्यादित होते है ।

१०,मकर – इसकी आकृति मगर की होती है। कालपुरुष शरीर में दोनों घुटनों पर माना जाता है । यह स्त्री राशि,वातप्रकृति ,पृथ्वीतत्व ,दक्षिण दिशा की स्वामिनी है । इसे कर्तब्यपरायण उचे विचार के गुण है।

११.कुम्भ -इस राशि की आकृति कन्धे पर घड़ा लिये पुरुष की है । यह पुरुष जाती ,वायुतत्व ,पश्चिम दिशा का स्वामि होता है । विज्ञान में रूचि में विशेष गुण होता है । कालपुरुष के सरीर में आंतों का विचार किया जाता है ।

१२,मीन – इस राशि की आकृति मछली की होती है । कालपुरुष के सरीर में दोनों पैर का स्थान माना जाता है। यह स्त्री जाती